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डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम क्या है?

Distributed System

जब हम तकनीकी दुनिया में कदम रखते हैं तब हमें समझ में आता है कि आज के समय में तकनीक का स्तर कितना उच्च हो गया है और जानने और समझने के लिए इतनी सारी चीज़ें हैं जिन्हें पढने और समझने में सारी जिंदगी बीत जाये। तो चलिए चलते हैं अपने मुख्य टॉपिक की और जो है डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम। यहाँ हम आपको डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम के बारे में हिंदी में जानकारी देंगे कि आखिर डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम होता है। वैसे तो डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम इंजीनियरिंग के क्षेत्र में बहुत अहमियत पूर्ण विषय है जिसका बड़ी-बड़ी कंपनी में भी उपयोग होता है और कहीं न कहीं अगर हम कंप्यूटर के क्षेत्र से जुड़े हैं या मोबाइल और कंप्यूटर का उपयोग करते हैं तो हम सभी भी इससे जुड़े हुए हैं।

  1. डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम क्या है? || What is Distributed System:

डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम को डिस्ट्रिब्यूटेड कंप्यूटिंग भी कहा जाता है। इसके अंतर्गत बहुत सारे कंप्यूटर होते हैं जो एक साथ मिलकर एक ही कंप्यूटर की तरह कार्य करते हैं। ये कंप्यूटर अलग-अलग जगह कनेक्ट हो सकते हैं। इसके अंतर्गत एक बड़े कार्य को कई मशीन के बीच बाँट दिया जाता है जिससे कि वह कार्य बहुत ही जल्दी पूर्ण हो जाता है। इसे डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम कहते हैं। आपस में जुड़ने के लिए ये नेटवर्क का प्रयोग करते हैं जैसे LAN या WAN

जितने भी कंप्यूटर होते हैं वे LAN या WAN का प्रयोग करके आपस में कनेक्ट होते हैं। एक डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम के अंतर्गत ये सभी डिवाइस आपस में जुडी हो सकती हैं जैसे Mainframes, Personal Computer, Servers, Virtual Machine और Mini Computer इत्यादि। एक ध्यान देने योग्य बात यह है कि इतने सारे डिवाइस होने के बाद भी यूजर या End User को ऐसा ही लगता है कि यह सिर्फ एक कंप्यूटर या सिर्फ एक इंटरफ़ेस है।

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अगर इसके उदहारण की बात करें तो इसका एक सबसे बड़ा उदहारण इन्टरनेट ही है जिसका उपयोग आज के समय में हर व्यक्ति कर रहा है।

डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम का इतिहास || History of Distributed System:

1960 में एक मेसेज को एक जगह से दूसरी जगह भेजने के लिए ऑपरेटिंग सिस्टम आर्किटेक्चर की स्टडी की जा रही थी। तब 1970 में पहली बार डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम को शेयर किया गया जहाँ Ethernet के तौर पर Local Area Network सामने आया।

डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम क्यों आवश्यक है? || Why Distributed System Required?:

किसी भी चीज़ को बिना मतलब के उपयोग नहीं किया जाता फिर वह तकनीक ही क्यों न हो। जब एक नई तकनीक आती है तो पुरानी तकनीक का महत्व कम हो जाता है। जब किसी कार्य या किसी टास्क को एक निश्चित समय में पूरा करना होता है तो उस समय अगर डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम का प्रयोग किया जाये तो उस कार्य या टास्क को एक कंप्यूटर के समूह में बाँट दिया जाता है जिससे कम स्पेस और कम समय में वह कार्य या टास्क पूरा किया जा सकता है। डिस्ट्रिब्यूटेड का मतलब ही होता है बाँटना।

वैसे डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम को जितना सरल हम समझते हैं उतना सरल ये होता नहीं है इसे Deploy करना, इसको Manage करना और इसको Maintain करना बहुत ही मुश्किल होता है। लेकिन इसके द्वारा हुए कार्य के परिणाम बहुत उम्दा है इसलिए यह एक उम्दा तकनीक है।

उदहारण के तौर पर अगर LAN की बात करें तो जब इसका एक्सेस बढाया जाता है तो सर्वर पर लोड ज्यादा होने की वजह से सर्वर डाउन या क्रैश हो जाता है इसके लिए डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम को अपडेट करना पड़ेगा तब सही प्रकार से यूजर इन्टरनेट का एक्सेस कर पाएंगे। डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम में जब Autonomous कंप्यूटर की संख्या को बढ़ाना होता है तो इसमें स्केलिंग (Scaling) की जाती है। और इसके द्वारा कार्यों को बाँट दिया जाता है।

डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम के लाभ और हानि || Advantages and Disadvantages of Distributed System:

S.No. Advantages of Distributed System Disadvantages of Distributed System
1. जब इस तकनीक में कार्यों को या टास्क को विभिन्न कंप्यूटर के बीच बाँट दिया जाता है तो इससे कार्य या टास्क बहुत जल्दी पूरा होता है। इसको मैनेज करना थोडा जटिल है।
2. इसमें जितने भी नोड होते हैं वे स्वतंत्र प्रकार से कार्य करते हैं जिससे अगर जरुरत हो तो सिस्टम में एक या अन्य नए नोड को ऐड किया जा सके। जब भी डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम के अन्दर किसी प्रकार समस्या आती है तब Troubleshooting काफी मुश्किल होती  है।
3. इसमें सभी कंप्यूटर नेटवर्क की सहायता से आपस में जुड़े रहते हैं जिसमें जब भी आवश्यकता हो उस समय वे डाटा को एक दुसरे से शेयर कर सकें। ओपन होने की वजह से कभी-कभी सुरक्षा की परेशानी आती है।
4. यह इतना सिक्योर है कि अगर किसी एक नोड में किसी प्रकार की परेशानी आ जाये तो भी डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम अपना कार्य करता रहता है। मशीनों के साथ डाटा शेयर करने की वजह से कभी-कभी डाटा लोस भी हो सकता है।
5. इसमें कंप्यूटर एक दुसरे से नेटवर्क के द्वारा जुड़े रहते हैं तो प्रिंटर जैसे रिसोर्स को भी आसानी से उपयोग किया जा सकता है। End User तक कभी-कभी पूरा डाटा नहीं पहुँचता।

 

तो ये कुछ लाभ और हानि डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम में होती हैं लेकिन समय-समय पर यह अपडेट होता रहता है जिसकी वजह से इस पर विश्वास कायम है। तो यह थी डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम के बारे में जानकारी। अब तो आप समझ ही गए होंगे कि किस प्रकार से डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम कार्य करता है और यह कितनी महत्वपूर्ण तकनीक है।



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